मंगलवार, 2 अगस्त 2016

समय की जुबान....


समय का रटने रखने वालों सुनो इस समय की ये कहानी
समय समय पर आता है
खुली आँखों से तो अँधा भी पैर पसार जाता है।
समय की चाहत रखने वालों सुनो इस समय की जुबानी "मैं आता हूं तो न जाने लोग क्यों मन ही मन रोते फिर भी वे मुस्कुराते है,हंसते है लेकिन जब जाता हूं तो मेरी याद में सर जुकाये दर्द से एक बार फिर रोते है और अपने लब्जो में बस कहते है कि-" तू आया था तो मैंने तुजे न समझा बस तेरी चिंता में रोया था तुजे याद किया था तो फिर तू चला गया?" तब समय में जवाब दिया "मैं जब आया था तेरे पास तो तूने सिर्फ मेरा सोचा, इसी सोच में रोया पछताया था फिर भी तूने अपने बारे में भी सोचा न था। एक बार तूने देखा होता मेरा इतिहास तो होता तेरा आज कल्याण लोगो ने कहा था मेरे बारे में - समय बड़ा हे बलवान, किसी कि उम्मीदों के सहारे नहीं जियो, जियो तो मेरे साथ जियो"
तब समय फिर बोला " कल भी में तेरे साथ था आज भी में तेरे साथ हु फर्क बस इतना है कि कल में समय था आज में काल हु"अब भी मत रो मेरी याद में कुछ ऐसा कर जे काल बन जाए बस कल का और हो जाए फिर समय जीवन का....."

Written by Mukesh Patel

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