सोमवार, 26 दिसंबर 2016

My Classroom –my true inside word

स्कूल लाइफ सबसे बेस्ट लाइफ होती है। पढ़ाई के साथ-साथ थोड़ी मस्ती, शरारत, लड़ाई, इमोशन वगैरह सब कुछ स्कूल लाइफ मे ही तो होता रहता है। 11th क्लास तक सब मे समझ तो आ जाती है की स्कूल लाइफ क्या होतीं है। कुह इसी के साथ ही मेरी क्लास बहुत अनोखी ही है। यहा देखा जाये तो सब तरह के लोग मिल जाते है। कुछ पागल जैसे तो कुछ मस्ती वाले, कुछ झगड़ालू तो कुछ बकबक वाले। मेरे स्कूल के टीचर कहते है की महरावल  महासागर है, और ये सच भी है। 10वी के बाद यहा सब अलग-अलग स्कूल से आए हुये है। कुछ गाँव से तो कुछ शहर से। यहा सब मे कुछ न कुछ खासियत है। किसी को अकेला रहना अच्छा लगता है तो किसी को बस बांटे ही भाति है, किसी को सेल्फी पसंद है तो किसी को मोबाइल की लत, किसी को तो बस घूमना ही अच्छा लगता है ओर किसी को तो बस दूसरों के बारे मे झूठ बोलन। अगर मे अपने क्लासमेट्स के बारे मे एक-एक कर कहू तो ये word नहीं कोई उपन्यास जैसा लगेगा। कुछ खास लोग है जिनके बारे मैं यहा बताना चाहूँगा। शुरुआत पवन से की जाये तो पवन पटेल एक अच्छा लड़का है। मैंने आज तक इसे कभी भी दुःखी नहीं देखा है तो रोने का तो सवाल ही नहीं है। शुरुआत मे मैंने पवन पर ज्यड़ा ध्यान नहीं दिया था। मेरे हिसाब से इसके बोलने का तरीका थोड़ा मुझे अटपटा लगता है। कोई बात करेगा तो उसका जवाब या तो वह “रहने दे” से करेगा यहा “ह्ह हा” से करेगा और उसका हाथ वैसे ही एक्शन करेगा जैसा वो बोल रहा है। बांते तो बड़ी-बड़ी करता है पर मैंने तो देखा की 30% ही वो उसके मुताबिक काम करता है लेकिन कहा जाये तो पवन सब मिलकर एक अच्छा लड़का है ओर इसके संस्कार भी अच्छे है। बुरा बोल्न- झगड़ा करना और अफवाह फैलाने जैसा इसका सावभाव नहीं है। इसके बात नंबर आता है योगेश पटेल का, ऊपर से जितना शरीफ ओर भोला दिखता है उतना ही उंडर से चालक। हर काम मे वो अपना कोई न कोई काम ढूंढ ही लेता है। होशियार है, समझदार है, ओर सबसे इसकी बुरी आदत है कुछ भी बात को बिना सोचे समझे ही कह देना। मैंने इसे कई बार ये गलती करते देखा है। पवन की तरह ही इसका मन साफ है। अगली बारी विशाल की है। ये पागलो की तरह हरकते कारता है। डाइलोग तो एसी मारता है सामने वाला शर्मा जाये। थोड़ा सनकी स्टाइल का है। भाविन तो Zee मीडिया की तरह ही बोलता है। मेहुल क्लास का सबसे अच्छा लड़का है। इसके बाद नंबर आता है राहुल का। राहुल ऊपर से भोला और अंदर से भी ऐसा है। अब बारी बकबक मशीन ईशान पंचाल की है। सुबह से दोपहर तक जीतने एनर्जी होती है वो उसके पीछे खर्च हो जाती है। ईशान का नेचर तो ठीक है पर बाते बहुत करता है वो भी इतनी स्पीड से की मुझे तो समझ मे ही नहीं आता। आनंद को तो सब बना बनाया चाहिए। एक्जाम के टाइम मे whatsapp अप पेपर मांगता है और कहता है की काम है। मुकेश रोत को तो मीने क्लास मे जब भी देखा है लिखता ही देखा है। जीतीन कांसारा का तो काम ही है मस्ती करना और दौरो को परेशान करना। इसके बाद सिद्धार्थ जोशी का नंबर आता है। बाते करना कोई इससे सीखे। कब क्या और किसकी बात करता है किसी को हवा भी नहीं लगती। बाते वास्तविक है या फिर फाक रहा है कुछ पता नहीं। ज़्यादातर तो तुक्का ही होती है। अब बारी वार्तिक की है। ये क्लास मे बॉय्ज़ मे सबसे टोप्पर लड़का है। मेरे पास ही बैठता है और ईशान के साथ मिलकर मेरा भेजा खराब करता है। अंदर से इसका दिल भी साफ है। पूरे दिन ईशान,रितिक(गुरुजी) और निशान्त पंचाल के साथ मिलकर रहता है और मुझे किसी ओर के पास बैठने नहीं देता है। और डब्बींग तो एसे करता है की सचमुच कोई हीरो आ गया हो। निशान्त पंचाल और मैं मोबाइल के नए सोफ्टवेरे की पीछे ही रहते है। लक्षमन मोडिया तो क्लास का सबसे ज्यादा शेतनी करने वालों मे से एक है। मॉनिटर का काम ये ही करता है। जितेंद्र यादव तो कॉमेडी मेन है। पता ही नहीं चलता को सब उसकी बाटो पर हस्ते है या फिर उस पर। लड़को मे तो सब इसी तरह के है। लड़कियो की बात की जाये तो बाटो मे लड़कियो का हराना तो असंभव सा लगता है। पहली लिने मे बैठने वाली क्लास की टोप्पर गर्ल्स को देखकर कहा नहीं जा सकता की ये इतना बोलती है। दामिनी,सुनीता,उर्वशी और वीधी यादव इतना बोलती है की मॉनिटर भी चुप नघि कर सकता। दामिनी ओर सुनीता तो थी है पर उर्वशी और विधि तो...। हीना नायक तो FB gifted है। बाकी का तो मे इतना ध्यान नहीं रखता। फिलहाल अभी के लिए इतना ही फिर आएंगे एक नए पोस्ट के साथ.... तब तक आप ये बताए की मेरा ये क्लासरूम कैसा लगा। अभी इस पोस्ट के कुछ क्लासमेट्स के बारे मे बारे मे बताना बाकी है जो मे फिर अगले पोस्ट मे बताऊंगा।

अगर मैंने किसी के बारे मे कुछ गलत कहा हो और आपको समझने मे गलफ़ेमि हुई है तो इसके लिए sorry…

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