रविवार, 23 अप्रैल 2017

धरती माता ( कविता)

धरती माता ( कविता)

धरती माता ( कविता)

धरती हमारी माता है,माता को प्रणाम करो
बनी रहे इसकी सुंदरता,ऐसा भी कुछ काम करो
आओ हम सब मिलजुल कर,इस धरती को स्वर्ग बना दें
देकर सुंदर रूप धरा को,कुरूपता को दूर भगा दें
नैतिक ज़िम्मेदारी समझ कर,नैतिकता से काम करें
गंदगी फैला भूमि परमाँ को न बदनाम करें
माँ तो है हम सब की रक्षकहम इसके क्यों बन रहे भक्षक
जन्म भूमि है पावन भूमि,बन जाएँ इसके संरक्षक
कुदरत ने जो दिया धरा को ,उसका सब सम्मान करो
न छेड़ो इन उपहारों को,न कोई बुराई का काम करो
धरती हमारी माता है,माता को प्रणाम करो
बनी रहे इसकी सुंदरता,ऐसा भी कुछ काम करो

आओ हम सब धरा को सुन्दर बनाने में सहयोग दें हमारी धरती की सुन्दरता को बनाए रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है... 
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